मिल्के ख़ासे किब्रिया हो

मिल्के ख़ासे किब्रिया हो

मिल्के ख़ासे किब्रिया हो

मालिके हर मा सिवा हो

कोई क्या जाने कि क्या हो

अ़क़्ले आ़लम से वरा हो

कन्ज़े.मक़तूमे अज़ल में

दुर्रे मक्नूने खुदा हो

सब से अव्वल सब से आख़िर

इब्तिदा हो इन्तिहा हो

थे वसीले सब नबी तुम

अस्ल मक़सूदे हुदा हो

पाक करने को वुज़ू थे

तुम नमाजे़ जां फ़िज़ा हो

सब बिसारत की अज़ां थे

तुम अज़ां का मुद्दआ़ हो

सब तुम्हारी ही ख़बर थे

तुम मुअख़्ख़वर मुब्तदा हो

कुर्बे ह़क़ की मन्ज़िलें थे

तुम सफर क मुन्तहा हो

क़ब्ले ज़िक्र इज़मार क्या जब

रुत्बा साबिक़ आप का हो

तूरे मूसा चर्ख़े ई़सा

क्या मुसाविये दना हो

सब जिहत के दाएरे में

शश जिहत से तुम वरा हो

सब मकां तुम ला मकां में

तन हैं तुम जाने सफ़ा हो

सब तुम्हारे दर के रस्ते

एक तुम राहे खुदा हो

सब तुम्हारे आगे शाफ़ेअ़

तुम हुज़ूरे किब्रिया हो

सब की है तुम तक रसाई

बारगह तक तुम रसा हो

वोह कलस रौज़े का चमका

सर झुकाओ कज कुलाहो

वोह दरे दौलत पे आए

झोलियां फैलाओ शाहो
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