वाह क्या जूदो करम है शहे बत्हा तेरा
वाह क्या जूदो करम है शहे बत्हा तेरा वाह क्या जूदो करम है शहे बत्हा तेरा नहीं सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा धारे चलते हैं अंत़ा के वोह है क़त...
वाह क्या जूदो करम है शहे बत्हा तेरा वाह क्या जूदो करम है शहे बत्हा तेरा नहीं सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा धारे चलते हैं अंत़ा के वोह है क़त...
वो सुए लाला ज़ार फिरते हैं तेरे दिन ऐ बहार फिरते हैं जो तेरे दर से यार फिरते हैं दर बा दर यूं ही ख्वार फिरते हैं आह कल ऐश तो किया हमनें आज वह...
ज़हे इ़ज़्ज़तो ए’तिलाए मुह़म्मद ﷺ कि है अ़र्शे ह़क़ ज़ेरे पाए मुह़म्मद ﷺ मकां अ़र्श उन का फ़लक फ़र्श उन का मलक ख़ादिमाने सराए मुह़म्मद ﷺ खुदा की रिज़...
हम खाक है और ख़ाक ही मावा है हमारा खाकी तो वोह आदम जदे आला हे हमारा अल्लाह हमे खाक करे अपनी तलब मे येह खाक तो सरकार से तमगा हे हमारा जिस खाक...
लुत्फ़ उनका आम हो ही जाएगा शाद हर नाकाम हो ही जाएगा जान दे दो वा’दाए दीदार पर नक़्द अपना दाम हो ही जाएगा शाद है फ़िरदौस या’नी एक दिन क़िस्मते खु...
अर्श की अ़क़ल दंग है चर्ख़ में आस्मान है अ़र्श की अ़क़्ल दंग है चर्ख़ में आस्मान है जाने मुराद अब किधर हाए तेरा मकान है बज़्में सनाए जुल्फ़ में म...
वो कमाले हुस्ने हुज़ूर है कि गुमान नक़्स जहां नहीं यही फूल ख़ार से दूर है यही शम्मा है कि धुआं नहीं दो जहां की बेहतरियां नहीं कि अमानिये दिलो ज...
या इलाही हर जगह तेरी अ़त़ा का साथ हो जब पड़े मुश्किल शहे मुश्किल कुशा का साथ हो या इलाही भूल जाऊं नज़्अ़ की तक्लीफ़ को शादिये दीदारे ह़ुस्ने-म...
सब से औला व आ’ला हमारा नबी सब से बाला व वाला हमारा नबी अपने मौला का प्यारा हमारा नबी दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी बज़्मे आख़िर का शम्अ़ फ़रोज़...
दिल को उनसे खुदा जुदा न करे बे कसी लूट ले खुदा न करे इस में रौज़े का सज्दा हो कि तवाफ़ होश में जो न हो वोह क्या न करे यह वही हैं के बख़्श देते ...
अ़र्शे हक़ है मस्नदे रिफ़अत रसूलुल्लाह की अ़र्शे ह़क़ है मस्नदे रिफ़अ़त रसूलुल्लाह की देखनी है ह़श्र में इ़ज़्ज़त रसूलुल्लाह की क़ब्र में लहराएंग...
अ़र्शे हक़ है मस्नदे रिफ़अत रसूलुल्लाह की अ़र्शे ह़क़ है मस्नदे रिफ़अ़त रसूलुल्लाह की देखनी है ह़श्र में इ़ज़्ज़त रसूलुल्लाह की क़ब्र में लहराएंग...
आंखें रो रो के सुजाने वाले आंखें रो रो के सुजाने वाले जाने वाले नहीं आने वाले कोई दिन में यह सरा ऊजड़ है अरे ओ छाउनी छाने वाले ज़ब्ह़ होते हैं...
हाजियो ! आओ शहंशाह का रौज़ा देखो का’बा तो देख चुके का’बे का का’बा देखो रुक्ने शामी से मिटी वहशते शामे गुरबत अब मदीने को चलो सुब्हे दिलआरा दे...
सरवर कहूं के मालिको मौला कहूं तुझे सरवर कहूं कि मालिको मौला कहूं तुझे बाग़े ख़लील का गुले ज़ैबा कहूं तुझे ह़िरमां नसीब हूं तुझे उम्मीदे गह कहूं...
चमक तुझ से पाते हैं सब पाने वाले चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले बरसता नहीं देख कर अबरे रहमत बदों पर भी बरसा...
पुल से उतारो राह गुज़र को ख़बर न हो जिब्रील पर बिछाएं तो पर को ख़बर न हो कांटा मेरे जिगर से ग़मे रोज़गार का यूं खींच लीजिये कि जिगर को ख़बर न हो फ़...
उनकी महक ने दिल के गुन्चे खिला दिये हैं जिस राह चल दिये हैं कूचे बसा दिये हैं जब आ गई हैं जोशे रहमत पे उनकी आंखें जलते बुझा दिये हैं रोते हस...
या इलाही रहम फ़रमा मुस्तफा़ के वासिते या इलाही रह़म फ़रमा मुस्तफ़ा के वास्ते मुश्किलें हल कर शहे मुश्किल कुशा के वास्ते कर बलाएं रद शहीदे करबल...
है कलामे इलाही में शम्सो दुह़ा तेरे चेहरए नूर फ़ज़ा की क़सम क़-समे शबे तार में राज़ यह था कि ह़बीब की जुल्फ़े दोता की क़सम तेरे ख़ल्क़ को ह़क़ ने अज़ीम...